शिवगंज-राज्य के प्रारम्भिक शिक्षा के अधीन प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक स्कूलों में छात्र नामांकन शुन्य एवं प्राथमिक में 15 व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 25 से कम विद्यार्थियों की संख्या वाले विद्यालयों को मर्ज/बंद करने की योजना का राजस्थान शिक्षक संघ(प्रगतिशील) के प्रदेश मुख्य महामंत्री धर्मेन्द्र गहलोत ने विरोध व्यक्त कर छात्र विरोधी निर्णय घातक साबित होगा । संघ(प्रगतिशील) के प्रदेश मुख्य महामंत्री धर्मेन्द्र गहलोत ने बताया है कि शिक्षा विभाग एवं राज्य सरकार स्तर पर प्राथमिक विद्यालय में 15 छात्र नांमाकन से कम व उच्च प्राथमिक में 25 छात्रों से कम छात्रों के साथ ही अंग्रेजी माध्यम की महात्मा गांधी विद्यालयों में कक्षा 9 से 12 तक में 30 से कम, उन्हें भी बन्द करने की कवायद या योजना छात्र विरोधी निर्णय कहे जाने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी क्योंकि सरकार लगभग सात हजार स्कूल मर्ज करने की तैयारी कर रही है, यानि यह तो स्पष्ट है कि तत्कालीन वसुन्धरा सरकार में हजारों स्कूलों का एकीकरण व मर्ज करने से सैकड़ो छात्रो का नांमाकन स्तर गिर करके शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हुई। जिससे स्टाफ का स्टाफिंग पेटर्न के माध्यम से सैकड़ों पदों को तोड़ा गया था। जिसका राज्य भर में भारी विरोध के बावजूद स्कूलों का मर्जीकरण हो गया। वर्तमान भजनलाल सरकार भी स्कूलों को मर्ज करने की और आमादा है। लेकिन बड़े खेद के साथ लिखना पड़ रहा है कि बच्चों को मौलिक अधिकार के तहत प्रत्येक बच्चों को निःशुल्क शिक्षा का अधिकार एवं बुनियादी शिक्षा मिले उससे वंचित करने की योजना शिक्षा अधिकार के प्रावधानों का घोर उल्लंघन है। सरकार का काम प्रत्येक बच्चों को शिक्षा सहज सुलभ मिले। जिसमें छात्र नांमाकन कोई बाधा नही होना चाहिए। वर्तमान राज्य सरकार तत्कालीन गहलोत सरकार के उस निर्णय की तरफ भी ध्यान देना चाहिए। जिसमे गाँव-गाँव राजीव गांधी पाठशाला खोलकर के प्रत्येक बच्चों को बेहतर बुनियादी शिक्षा देने का छात्र हित में फैसला उचित एवं साहसिक था। लेकिन वर्तमान में शिक्षा विभाग व सरकार द्वारा स्कूलों को मर्ज करने की योजना घातक एवं छात्र विरोधी निर्णय कहने में कोई संकोच नहीं है।
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