शिवगंज : इस बार शैक्षिक सत्र के आरम्भ के बाद स्कूले 1जुलाई के स्थान पर 21जून को खोलने की घोषणा से राज्य भर के शिक्षकों में ग्रीष्मकालीन अवकाशों में कटौती को लेकर जबरदस्त आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। यह उद्घार राजस्थान शिक्षक संघ(प्रगतिशील) के प्रदेश मुख्य महामंत्री धर्मेन्द्र गहलोत ने शिक्षकों से सदस्यता अभियान में संवाद के दौरान देखने को मिले।
संघ(प्रगतिशील) के प्रदेश मुख्य महामंत्री धर्मेन्द्र गहलोत ने बताया है कि संगठन का व्यापक स्तर पर चल रहे सदस्यता अभियान में शिक्षकों से संवाद एवं समस्याओं को निराकरण को लेकर के गाँव-गाँव ढाणी-ढाणी में शिक्षको से जन सम्पर्क कार्यक्रम के दौरान लगभग 75 स्कूलों में अब तक जाने का अवसर मिला। जिसमें लगभग 800 शिक्षकों से संवाद हुआ। जिसमें सभी से शिक्षको ने संगठन को राज्य सरकार द्वारा ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद 21जून को स्कूलों को खोलने पर गहरी नाराजगी प्रकट की है। ज्यादातर शिक्षको ने 1 जुलाई को ही स्कूल खोलने का प्रावधान भौगोलिक दृष्टि से उचित ही नही व्याहावारिक भी है। भीष्म गर्मी मे बच्चो का स्कूलो के प्रति आकर्षण नहीं रहता है। उस दौरान अगर स्कूले खुली भी रखी जायेगी तो छात्र नामांकन की स्थिति नगण्य रहेगी। ऐसे में राज्य सरकार को छात्रहित में एक ग्रीष्मकालीन अवकाश 16 मई से 30 जून करके एक जुलाई को ही स्कूले खोलने पर पुर्नविचार किये जाने की मांग की है। शिक्षकों में गीष्ममकालीन अवकाशों में की गई 10 दिन की कटौती से सरकार के प्रति गहरी नाराजगी देखने को मिली है। तत्कालीन राज्य सरकार ने भी बहुत सोच समझकर के छात्रहित एवं राज्य की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए ही ग्रीष्मकालीन अवकाश 16 मई से 30 जून तक करके एक जुलाई को स्कूल खोलकर साहसिक प्रयास से शिक्षा,शिक्षार्थी शिक्षक हित में फैसले से शिक्षकों को राहत मिली थी लेकिन इस बार राज्य सरकार एक 1जुलाई के स्थान पर 21 जून को स्कूल खोलने की घोषणा सरकार के गले की फाँस बनती दिख रख रही है। राज्य सरकार को शिक्षको का भारी विरोध झेलना पड़ेगा। अगर समय रहते सरकार को पुनविचार करने की संगठन पूरजोर शब्दों में दरकार करता है। इस अभियान में छगनलाल भाटी,जिला मंत्री, रमेश रांगी जिला कोषाध्यक्ष, विनोद नैनावत, शैतान सिंह देवड़ा जिला उपाध्यक्ष भी उपस्थिति रहे।
