शिवगंज (सेसाराम गेहलोत)_ राजस्थान गवर्नमेन्ट हेल्थ स्कीम(आरजीएचएस) में ओपीडी के तहत 2 हजार से अधिक की जांच के लिए पोर्टल पर पूर्व स्वीकृति अनिवार्य किये जाने के निर्णय पर राजस्थान शिक्षक संघ(प्रगतिशील) के प्रदेश मुख्य महामंत्री धर्मेन्द्र गहलोत ने नाराजगी जताकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर कर्मचारी विरोधी जाँच के नाम पूर्व स्वीकृति स्वीकार योग्य नही है संघ(प्रगतिशील) के प्रदेश मुख्य महामंत्री धर्मेन्द्र नाहलोत ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में बताया है कि आरजीएचएस योजना के तहत प्रदेश के लाखो कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुरक्षा योजना संजीवनी का काम कर रही है। पूर्व में चिकित्सक द्वारा लिखी गई आवश्यक जाँचो का भुगतान बीना अतिरिक्त मंजूरी के हो जाता था लेकिन अब 2 हजार रूपये से अधिक की जाँच के लिए पोर्टल से पूर्व स्वीकृति की बाध्यता के कारण मरीजों को अस्पतालों में इन्तजार करना पड़ रहा है। हर बार पोर्टल से मंजूरी लेने की अनिवार्यता किसी भी स्थिति में व्यावहारिक नहीं है। इससे कर्मचारियों के उपचार में अनावश्यक देरी होगी जिससे मरीजों को हैरान परेशान होना पड़ेगा। संगठन ने राज्य सरकार से जाँच से पूर्व स्वीकृति लेने की व्यवस्था को समाप्त करवाकर यदि किसी भी चिकित्सक,अस्पताल या संस्थान की ओर से कोई भी अनियमितता अथवा भ्रष्टाचार किया जाता है तो राज्य सरकार को दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही अमल में लानी चाहिए। प्रदेशाध्यक्ष बन्नाराम चौधरी,सभाध्यक्ष किशनलाल सारण,कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष नीरज शर्मा,जसवन्त सिंह नरूका,धुलीराम डाँगी,हरीराम कलावन्त,आनन्द पारीक,प्रभाराम चौधरी,कैलाश गौड़,लच्छीराम गुर्जर,रामेश्वरी विश्नोई,दिपीका वर्मा,इन्द्रा विश्नोई,प्रिती गुर्जर,डॉ. विष्णु कुमार तैली,विजय आनन्द गुप्ता,बृजमोहन मीणा,बालकृष्ण मीना,सत्येन्द्र सिंह राठौड, किशोर कुमार,रमेश रांगी,अशोक त्रिवेदी,कान्तिलाल मीना सहित प्रदेश कार्यकारिणी के समस्त पदाधिकारियों ने 2 हजार से अधिक की जाँच के लिए पूर्व स्वीकृति लेने की व्यवस्था की घोर निंदा करते हुए कर्मचारीयों के विरोधी व्यवस्था को तत्काल समाप्त की जानी चाहिए अन्यथा संगठन आन्दोलन की रणनीति तय करेगा।
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