हाथों में पहली बार पक्का स्कूल बैग आया, अरावली के आदिवासी बच्चों की आंखों में छलकी खुशी

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सुमेरपुर। अरावली की सूरमयी पहाड़ियों में बसे आदिवासी गांव कपिधरा, गोरिया (बाली) के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में मंगलवार का दिन बच्चों के लिए खास बन गया। वर्षों से हाथ में या प्लास्टिक की थैलियों में किताबें लेकर स्कूल आने वाले 71 आदिवासी विद्यार्थियों को जब पहली बार स्कूल बैग मिला तो उनके चेहरों पर मुस्कान अपने आप फैल गई। किसी ने बैग को सीने से लगाया तो कोई उसे बार-बार खोलकर देखता रहा।

भारतीय रेडक्रोस सोसायटी शाखा सुमेरपुर द्वारा यह सेवा कार्य कक्षा एक से पांच तक के सभी 71 विद्यार्थियों के लिए किया गया। स्कूल परिसर में जैसे ही बच्चों को नए बैग मिले, पूरा माहौल खुशी और उत्साह से भर गया। यह आयोजन भारतीय रेडक्रोस सोसायटी पाली शाखा के पूर्व अध्यक्ष स्व. जगदीश गोयल की स्मृति में आयोजित किया गया। रेडक्रोस शाखा सदस्य प्रियंका मेवाड़ा ने बताया कि अरावली के इस दुर्गम क्षेत्र में कई बच्चे आर्थिक अभाव के कारण आवश्यक शैक्षणिक संसाधनों से वंचित रहते हैं। विद्यालय के प्रधानाध्यापक आनंद कुमार डांगी द्वारा जब यह बताया गया कि कई बच्चे आज भी थैली में किताबें लेकर आते हैं, तब रेडक्रोस परिवार ने कुछ अलग करने का निर्णय लिया। शाखा के चार्टर अध्यक्ष पंकज राज मेवाड़ा ने यह देखते हुए बच्चों को स्वयं स्कूल बैग भेंट किए। उन्होंने कहा कि बच्चों के चेहरों पर आई खुशी देखकर महसूस हुआ कि यही निःस्वार्थ सेवा का सच्चा अर्थ है। इसी सेवा कार्य के माध्यम से हमने स्व. जगदीश गोयल की स्मृति को श्रद्धांजलि अर्पित की है। कार्यक्रम के दौरान प्रधानाध्यापक आनंद कुमार डांगी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि इन बच्चों के लिए यह सिर्फ एक बैग नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और आगे बढ़ने की प्रेरणा है। विद्यालय के अध्यापक जितेंद्र कुमार, निधि पंवार, विद्यालय प्रबंधन समिति अध्यक्ष देवाराम गरासिया सहित ग्रामीण दानाराम, गणेशराम, रमेशकुमार, प्रवीणकुमार और प्रदीप कुमार ने रेडक्रोस परिवार के इस मानवीय प्रयास की सराहना की। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे छोटे-छोटे प्रयास ही आदिवासी अंचल के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और उनके सपनों को नई उड़ान देने का माध्यम बनते हैं।

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Author: a1khabarfast

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