शिवगंज(ओमप्रकाश परिहार)। केन्द्र सरकार ने हाल ही में कर्मचारियों के हित के श्रम कानून को बदलकर देशभर में करोड़ों मजदूर कर्मचारियों के अधिकारों के साथ खुले आम हमला करके श्रम संहिताओं का लागू किया जाना कर्मचारियों के भविष्य के साथ सबसे बड़ा हमला कहे तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। अखिल राजस्थान राज्य संयुक्त कर्मचारी महासंघ सिरोही के जिलाध्यक्ष धर्मेन्द्र गहलोत ने मोदी सरकार द्वारा लागू किये गये चार लेबर कोड मजदुरो,कर्मचारियों के लिए घातक साबित होगे। महासंघ के जिलाध्यक्ष धर्मेन्द्र गहलोत ने बताया कि पिछले सौ वर्षो के संघर्षों,शहादतो एवं जन आन्दोलनों और हडतालो की कुर्बानी देकर हासिल किए गए 29 कल्याणकारी श्रम कानूनों को एक झटके में मोदी सरकार ने खत्म करके चार लेबर कोड की संहिताएँ थोपकर मजदूरों के साथ सरकार ने कुठाराघात किया है। अब न्यूनतम मजूदरी व अन्य लाभ नियोक्ता की मर्जी के तहत ही विभागों व मालिकों के हाथो मे कैद या दया पर निर्भर होगे। जिसमें 90 प्रतिशत मजदूर इस कानून के बाहर हो जाएंगे। सुरक्षा व स्वास्थ्य सम्बन्धी संहिता में केवल 40 से अधिक मजदूरो वाले प्रतिष्ठानों पर लागू होगी। इससे देश के अधिकांश असंगठित मजदूर कानूनी संरक्षण से बाहर हो जाएंगे। ईएसआई,पीएफ,पेन्शन,एक्स ग्रासिया,भत्ते,छुट्टियों की भी कोई गारंटी नही,सामाजिक सुरक्षा संहिता असल में समाज के पूंजीपतियों की सुरक्षा के तहत इन सुविधाओ का निर्णय भी केन्द्र व राज्य सरकार के नोटिफिकेशन पर निर्भर होगा। यानि अब अधिकार नहीं दया बन जायेंगे। नौकरी नियमत्ता की सुरक्षा खत्म हो जायेगी। जब चाहे मालिक,चाहे बहाना बनाकर नौकरी से निकाल सकते हैं। साथ ही औद्योगिक संहिता में 300 तक मजदूरों वाले संस्थानों में मनचाहा कर्मचारियो की छटनी करने का खुला अधिकार देती है। अब मजदूर हडताल में जाने से पहले सरकार व मालिको की सहमति अनिवार्य होगी। इसके अलावा ठेका प्रथा को पुरी तरह वैध करने के साथ ही नियमित सुरक्षित रोजगार को ही समाप्त कर दिए जाएंगे। इस तरह देश के मजदूरों पर हुए कुठाराघात पर अखिल भारतीय राज्य कर्मचारी महासंघ की मजदूर हितों की के साथ होने वाले कुठाराघात के विरोध में महासंघ ने भी पूरजोर शब्दों में मजदूरों के हितों के लिए संघर्ष का समर्थन दिये जाने की घोषणा की है। महासंघ मजदूर हितों को सुरक्षित रखने के लिए संघर्षशील रहेगा। गहलोत ने कहा है कि लेबर कोड की घातक संहिताएँ सरकारी सेवा में निजीकरण,आउटसोर्सिंग,ठेकाकरण,पद समाप्तिकरण,सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था कार्य हमारे अधिकारों को समाप्त करने की दिशा में पहला कदम है। लेबर कोड के बहाने देश मजदूर व कर्मचारियों के अधिकारों को समाप्त करने की दिशा में आगे बढने का तात्पर्य “गुलामी युग की वापसी” जैसा प्रतित हो रहा है। राज्य व देशभर में आज श्रम कानून समाप्त कर चार संहिताए बनाने को लेकर कर्मचारियों व महासंघ ने विरोध स्वरूप प्रतिरोध दिवस के रूप में ट्रेड यूनियन आज इन लेबर कोड लागू किये जाने की घोषणा का विरोध किया है।
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