कथा में पार्वती जन्म और शिव- पार्वती विवाह के प्रसंगों ने किया आह्लादित  शिव पार्वती की झांकियों ने, मोहा महिलाओं को

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शिवगंज। आखरिया चौक स्थित सारणेश्वर महादेव मंदिर परिसर में, महा शिवरात्रि के पावन अवसर, आंठ दिवसीय शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन पार्वती जन्म और शिव – पार्वती विवाह के प्रसंगों ने धर्म प्रेमी श्रोताओं को आह्लादित कर भावविभोर किया। श्री सारणेश्वर महादेव सेवा संस्थान के तत्वावधान में आयोजित कथा में महिलाएं बढ़- चढ़ कर भाग ले रहीं हैं। आयोजन समिति संयोजक माणक प्रजापत ने बताया कि, श्री धाम वृन्दावन के सुविख्यात कथा वाचक पंडित कमलकांत पाराशर महाराज की संगीतमय कथा का आयोजन महा शिवरात्रि के अवसर पर आयोजित किया गया है। आज की कथा में शिव- पार्वती की झांकियों ने महिलाओं और बच्चों को मोहित किया। कथा आयोजन समिति के प्रवक्ता सोमप्रसाद साहिल से प्राप्त जानकारी अनुसार, आज के प्रसंग में, दक्ष प्रजापति ने यज्ञ अनुष्ठान में, सती और शिव को आमंत्रित नहीं किया। नाराज सती ने यज्ञ में प्राणों की आहुति दे दी। जब भगवान शिव को ये संदेश प्राप्त हुआ, शिव ने अपनी जटाओं में से एक जटा को जमीन पर पटका तो, वीरभद्र प्रकट हुए और यज्ञ में उपद्रव मचाया। भृगु महाराज ने नैत्र फोड़ दिए एवं दक्ष का वध कर लिया। भोलेनाथ ने दक्ष के धड़ पर, बकरे का सिर लगाकर जीवित किया। समिति के दूदाराम गेहलोत ने बताया कि, सति का अगला जन्म पर्वतराज हिमालय के घर पार्वती के रूप में हुआ। देवी पार्वती का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। सभी भक्तजन वस्त्र और मिठाइयां बधाई स्वरूप लेकर आए। पार्वती का विवाह भगवान शिव से, हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर सुधि श्रोताओं ने वस्त्र , बर्तन , चांदी के आभूषण आदि कन्यादान में भेंट किए।

कथावाचक पाराशर महाराज ने कहा कि, पिता के घर, मित्र के घर और और गुरू के घर बिना बुलाए जा सकते हैं, लेकिन विरोध की स्थिति में, वहां भी नहीं जाना चाहिए। जहां बड़े – बुजुर्गों का सम्मान नहीं, वहां किसी भी परिस्थिति में नहीं जाना चाहिए। कथा में प्रबुद्धजन महेंद्र कुमार दवे, शंकर लाल सोलंकी, प्रेमाराम प्रजापत, दलपत सिंह सिंदल, ललिता रामावत, सुगना देवी, रजनी शर्मा आदि उपस्थित थे। कथा कार्यक्रम का संचालन प्रकाश खण्डेलवाल कर रहे हैं। संस्थान के उपाध्यक्ष नारायण लाल घांची, कोषाध्यक्ष पूनम सिंह पंवार, अशोक अग्रवाल, कानाराम प्रजापत, दिनेश परिहार, चम्पत प्रजापत व्यवस्था संभालने में लगे हुए थे।

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Author: a1khabarfast

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